चाचा ने गांड मारी और बूर चोदा

Chacha Bhatiji Sex Story : मेरा नाम काजल है, और मैं 21 साल की हूँ। मैं एक छोटे से गाँव में रहती हूँ। मेरा शरीर बहुत आकर्षक है—गोरी चमड़ी, मोटे चूचे, और भारी गांड। मेरे चाचा, राकेश, 40 साल के हैं—मज़बूत कद-काठी, और उनकी पैंट में उभरता लंड मुझे हमेशा तड़पाता था। चाचा गाँव में अकेले रहते थे, और मैं अक्सर उनके घर जाती थी। लेकिन मुझे नहीं पता था कि एक दिन चाचा मेरी चूत और गांड दोनों चोदेंगे।

एक दिन की बात है। मैं चाचा के घर गई थी। मम्मी-पापा शहर गए थे, और मैंने सोचा कि चाचा के साथ समय बिता लूँ। मैंने एक टाइट कुर्ती और लेगिंग्स पहनी थी, जिसमें मेरे चूचे और गांड साफ़ दिख रहे थे। चाचा मुझे देखते ही मुस्कुराए। “काजल, आज तो तू बहुत हॉट लग रही है,” उन्होंने कहा। “चाचा, आप भी ना,” मैंने शरमाते हुए कहा। लेकिन उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी।

रात होने लगी। चाचा ने कहा, “काजल, आज यहीं रुक जा।” मैंने हाँ कह दिया। रात के 11 बजे चाचा मेरे कमरे में आए। “काजल, सो गई?” उन्होंने पूछा। “नहीं, चाचा, नींद नहीं आ रही,” मैंने कहा। चाचा मेरे बिस्तर पर बैठ गए और मेरे करीब आ गए। “काजल, तेरा बदन मुझे पागल कर रहा है,” उन्होंने गरम लहजे में कहा। “चाचा, ये क्या कह रहे हो?” मैंने डरते हुए पूछा, लेकिन मेरी चूत गीली हो रही थी।

चाचा ने मेरे हाथ पकड़े और मुझे बिस्तर पर दबा दिया। “काजल, तेरी चूत और गांड आज मैं चोदूँगा,” उन्होंने कहा और मेरी कुर्ती फाड़ दी। मेरे चूचे नंगे हो गए। “क्या मस्त चूचे हैं, काजल,” चाचा ने कहा और एक निप्पल को मुँह में भर लिया। “आह्ह, चाचा, चूसो,” मैं सिसक उठी। मेरी चूत से रस टपकने लगा। उन्होंने मेरी लेगिंग्स और पैंटी उतार दी। “काजल, तेरी चूत देखनी है,” चाचा ने कहा और मेरी टाँगें फैला दीं। मेरी चूत नंगी होकर चमकने लगी।

चाचा ने अपनी जीभ मेरी चूत पर फेर दी। “आह्ह, चाचा, चाटो, मेरी चूत का रस पी जाओ!” मैं चिल्लाई। उनकी जीभ मेरी चूत के होंठ चूस रही थी। “काजल, तेरी चूत का स्वाद गज़ब है,” चाचा ने कहा और अपनी धोती उतार दी। उनका मोटा लंड बाहर निकला—लंबा, सख्त और गरम। “चाचा, ये तो मेरी चूत फाड़ देगा!” मैंने डरते हुए कहा। उन्होंने हँसते हुए कहा, “काजल, तेरी चूत और गांड दोनों फाड़ने का मज़ा ही अलग है।”

चाचा ने मेरी चूत पर लंड रगड़ा। “पहले तेरी चूत चोदूँगा,” उन्होंने कहा और एक ज़ोरदार धक्का मारा। “आह्ह, चाचा, मेरी चूत फट गई!” मेरी चीखें कमरे में गूँज उठीं। उन्होंने तेज़ी से धक्के मारने शुरू किए। “काजल, तेरी चूत तो मेरे लंड को निगल रही है,” चाचा ने कहा। मेरी गांड हर धक्के के साथ हिल रही थी। “चाचा, और जोर से चोदो, मेरी प्यास बुझा दो!” मैं चिल्लाई। मेरी चूत से रस टपक-टपक कर बिस्तर पर गिर रहा था।

चुदाई का नशा चढ़ गया। चाचा ने मुझे बिस्तर पर कुतिया बनाया। “अब तेरी गांड में लंड डालूँगा,” उन्होंने कहा और मेरी गांड पर थप्पड़ मारा। “मारो, चाचा, मेरी गांड लाल कर दो!” मैंने कहा। उन्होंने अपना मोटा लंड मेरी गांड में पेल दिया। “आह्ह, चाचा, मेरी गांड फट गई, और तेज़!” मेरी चीखें तेज़ हो गईं। “काजल, तेरी गांड बहुत टाइट है,” चाचा ने कहा। मेरी चूत से रस बह रहा था, और मैंने अपनी उंगलियाँ अपनी चूत में डाल दीं। “चाचा, मेरी चूत और गांड दोनों को चोदो!” मैं सिसक उठी।

चुदाई का खेल बढ़ गया। चाचा ने मुझे बिस्तर पर लिटाया और मेरे ऊपर चढ़ गए। “अब तेरी चूत को गहरा चोदूँगा,” उन्होंने कहा और लंड मेरी चूत में ठोक दिया। “आह्ह, चाचा, मेरी चूत चीर डालो!” मैं चिल्लाई। उनका लंड मेरी चूत की गहराई तक जा रहा था। “काजल, तेरी चूत को चोद-चोद कर ढीली कर दूँगा,” चाचा ने कहा और मेरे चूचों को मसलते हुए धक्के मारे। “चोदो मुझे, चाचा, मुझे अपने लंड का मज़ा दो!” मेरी सिसकियाँ तेज़ हो गईं। बिस्तर हमारी चुदाई से हिल रहा था।

चाचा ने मुझे दीवार से सटा दिया। “काजल, तेरे होंठ चूसूँगा,” उन्होंने कहा और मेरे होंठ चूसने लगे। “आह्ह, चाचा, मेरे होंठ दबा दो!” मैंने कहा। उन्होंने मेरे होंठों को काटा और कहा, “काजल, तेरे होंठ तो शहद हैं।” मैंने उनका लंड पकड़ा और मसलते हुए कहा, “चाचा, मेरी चूत को फिर चोदो!” उन्होंने मुझे बिस्तर पर पटका और मेरी चूत में लंड ठोका। “तेरी चूत और गांड दोनों को रस से भर दूँगा,” चाचा ने चीखते हुए कहा। “और जोर से चोदो, मेरी प्यास बुझा दो!” मैं चिल्लाई।

रात गहराने लगी। चाचा ने मुझे बाथरूम में ले जाया। “काजल, यहाँ तेरी चूत को चोदूँगा,” उन्होंने कहा और मुझे शावर के नीचे खड़ा कर दिया। पानी मेरे नंगे जिस्म पर बह रहा था। “चाचा, पानी में चुदाई का मज़ा लो!” मैंने कहा। उन्होंने मुझे दीवार से सटाया और मेरी चूत में लंड ठोका। “आह्ह, चाचा, और जोर से!” मैं चिल्लाई। पानी हमारे जिस्म पर बह रहा था, और मेरी चूत उनके लंड को गीला कर रही थी। “काजल, तेरी चूत मेरे लंड की दीवानी है,” चाचा ने कहा।

सुबह होने को थी। चाचा ने मुझे अपनी गोद में बिठाया। “काजल, अब तेरी गांड फिर चोदूँगा,” उन्होंने कहा और मुझे उल्टा कर दिया। “चाचा, मेरी गांड में लंड डाल दो!” मैंने सिसकते हुए कहा। उन्होंने मेरी गांड में लंड पेल दिया। “आह्ह, चाचा, मेरी गांड फट गई, और तेज़!” मेरी चीखें कमरे में गूँज रही थीं। “काजल, तेरी गांड मेरे लंड की गुलाम है,” चाचा ने कहा और मुझे रगड़ने लगे। मेरी चूत से रस टपक रहा था। “चोदो मुझे, चाचा, मुझे अपनी रंडी बना दो!” मैं चिल्लाई।

आख़िर में चाचा का लंड फट पड़ा। उनका गरम रस मेरी चूत में भर गया, फिर मेरी गांड में, और बाक़ी मेरे चूचों और होंठों पर छिड़क गया। “आह्ह, चाचा, आपका रस मेरे मुँह में डालो,” मैंने कहा और उनके लंड से टपकता रस चाट लिया। हम दोनों हाँफते हुए बिस्तर पर गिर पड़े। “चाचा, आपने मुझे जन्नत दिखा दी,” मैंने हँसते हुए कहा। “काजल, अब हर बार जब तू यहाँ आएगी, ऐसा ही होगा,” चाचा ने जवाब दिया। उनकी चुदाई की गर्मी मेरे जिस्म में समा गई थी।