Dadi Pota Sex Story – मेरा नाम शांति है, और मैं 60 साल की हूँ। उम्र के बावजूद मेरा जिस्म अभी भी भरा हुआ है—गोरी चमड़ी, मोटे चूचे, और भारी गांड। मेरे पति की मृत्यु कई साल पहले हो चुकी थी, और तब से मेरी चूत की प्यास बुझाने वाला कोई नहीं था। मेरा पोता, अजय, 22 साल का है—लंबा, मज़बूत, और उसकी पैंट में उभरता मोटा लंड हमेशा मेरी नज़रों में रहता था। अजय गर्मियों की छुट्टियों में हमारे गाँव के घर में आया था, और उसकी नज़रें मुझे तड़पाने लगी थीं।
एक दोपहर की बात है। मैं किचन में खाना बना रही थी। अजय पीछे से आया और मेरी कमर पकड़ ली। “दादी, आप बहुत सुंदर लग रही हो,” उसने गरम लहजे में कहा। मैंने हँसते हुए कहा, “अजय, ये क्या बोल रहा है? मैं तो बूढ़ी हूँ।” उसने मेरे कानों में फुसफुसाया, “दादी, आपकी गांड और चूचे मुझे पागल कर रहे हैं।” मेरी साँसें तेज़ हो गईं। “अजय, ये गलत है,” मैंने कहा, लेकिन मेरी चूत गीली हो रही थी।
अजय ने मुझे किचन के स्लैब से सटा दिया। “दादी, आपकी चूत को मेरा लंड चखाऊँगा,” उसने कहा और मेरी साड़ी का पल्लू खींच दिया। मेरे चूचे नंगे हो गए। “क्या मस्त चूचे हैं, दादी,” अजय ने कहा और एक निप्पल को मुँह में भर लिया। “आह्ह, अजय, चूसो, मेरी चूत में आग लग रही है!” मैं सिसक उठी। उसने मेरी साड़ी पूरी उतार दी। “दादी, आपकी चूत देखनी है,” उसने कहा और मेरी टाँगें फैला दीं। मेरी चूत नंगी होकर चमकने लगी।
अजय ने अपनी जीभ मेरी चूत पर फेर दी। “आह्ह, अजय, चाटो, मेरी चूत को चूस डालो!” मैं चिल्लाई। उसने मेरी चूत के होंठ चाटे, और मेरा रस उसके मुँह में भर गया। “दादी, आपकी चूत का स्वाद गज़ब है,” अजय ने कहा और अपनी पैंट उतार दी। उसका मोटा लंड बाहर निकला—लंबा, सख्त और गरम। “अजय, ये तो मेरी चूत फाड़ देगा!” मैंने डरते हुए कहा। उसने हँसते हुए कहा, “दादी, आपकी चूत को फाड़ने का मज़ा ही अलग है।”
उसने मुझे स्लैब पर बिठाया और मेरी चूत पर लंड रगड़ा। “पहले आपकी चूत चोदूँगा,” अजय ने कहा और एक ज़ोरदार धक्का मारा। “आह्ह, अजय, मेरी चूत फट गई!” मेरी चीखें किचन में गूँज उठीं। उसने तेज़ी से धक्के मारने शुरू किए। “दादी, आपकी चूत तो मेरे लंड को निगल रही है,” अजय ने कहा। मेरी गांड हर धक्के के साथ थरथरा रही थी। “अजय, और जोर से चोद, मेरी प्यास बुझा दे!” मैं चिल्लाई। मेरी चूत से रस टपक-टपक कर स्लैब पर गिर रहा था।
अजय ने मुझे किचन से बेडरूम में ले जाया। “दादी, अब आपकी गांड में लंड डालूँगा,” उसने कहा और मुझे बिस्तर पर झुका दिया। “डाल दो, अजय, मेरी गांड को चोद डालो!” मैंने सिसकते हुए कहा। उसने मेरी गांड पर थप्पड़ मारा। “मारो, अजय, मेरी गांड लाल कर दो!” मैं चिल्लाई। उसने अपना मोटा लंड मेरी गांड में पेल दिया। “आह्ह, मेरी गांड फट गई, और तेज़!” मेरी चीखें तेज़ हो गईं। मेरी चूत से रस बह रहा था, और गांड उसके लंड को चूस रही थी। “दादी, आपकी गांड तो चूत से भी टाइट है,” अजय ने कहा और मुझे रगड़ने लगा।
चुदाई का नशा चढ़ गया। अजय ने मुझे बिस्तर पर लिटाया और मेरे ऊपर चढ़ गया। “अब आपकी चूत को गहरा चोदूँगा,” उसने कहा और लंड मेरी चूत में ठोक दिया। “आह्ह, अजय, मेरी चूत चीर डालो!” मैं चिल्लाई। उसका लंड मेरी चूत की गहराई तक जा रहा था। “दादी, आपकी चूत को चोद-चोद कर ढीली कर दूँगा,” अजय ने कहा और मेरे चूचों को मसलते हुए धक्के मारे। “चोदो मुझे, अजय, मुझे अपने लंड का मज़ा दो!” मेरी सिसकियाँ तेज़ हो गईं। बिस्तर हमारी चुदाई से हिल रहा था।
अजय ने मुझे दीवार से सटा दिया। “दादी, आपके होंठ चूसूँगा,” उसने कहा और मेरे होंठ चूसने लगा। “आह्ह, अजय, मेरे होंठ दबा दो!” मैंने कहा। उसने मेरे होंठों को काटा और कहा, “दादी, आपके होंठ तो शहद हैं।” मैंने उसका लंड पकड़ा और मसलते हुए कहा, “अजय, मेरी चूत को फिर चोदो!” उसने मुझे बिस्तर पर पटका और मेरी चूत में लंड ठोका। “आपकी चूत और गांड दोनों को रस से भर दूँगा,” अजय ने चीखते हुए कहा। “और जोर से चोदो, मेरी प्यास बुझा दो!” मैं चिल्लाई। उसकी चुदाई से मेरा पूरा जिस्म थरथरा रहा था।
शाम होने को थी। अजय ने मुझे बाथरूम में ले जाया। “दादी, यहाँ आपकी चूत को फिर चोदूँगा,” उसने कहा और मुझे शावर के नीचे खड़ा कर दिया। पानी मेरे नंगे जिस्म पर बह रहा था। “अजय, मेरी चूत को पानी में चोद डालो!” मैं चिल्लाई। उसने लंड मेरी चूत में ठोका और तेज़ी से पेलने लगा। “दादी, आपकी चूत मेरे लंड की दीवानी है,” अजय ने कहा। मेरे चूचे पानी में भीगकर चमक रहे थे। “आह्ह, और जोर से चोदो!” मैं चीखी। शावर की ठंडक और उसकी चुदाई की गर्मी से मेरा जिस्म काँप रहा था।
रात ढल गई। अजय ने मुझे अपनी गोद में बिठाया। “दादी, अब आपकी गांड फिर चोदूँगा,” उसने कहा और मुझे उल्टा कर दिया। “अजय, मेरी गांड में लंड डाल दो!” मैंने सिसकते हुए कहा। उसने मेरी गांड में लंड पेल दिया। “आह्ह, मेरी गांड फट गई, और तेज़!” मेरी चीखें कमरे में गूँज रही थीं। “दादी, आपकी गांड मेरे लंड की गुलाम है,” अजय ने कहा और मुझे रगड़ने लगा। मेरी चूत से रस टपक रहा था। “चोदो मुझे, अजय, मुझे अपनी रंडी बना दो!” मैं चिल्लाई। उसकी चुदाई की रफ्तार से बिस्तर थरथरा रहा था।
चुदाई का सिलसिला और तेज़ हुआ। अजय ने मुझे बिस्तर के किनारे लिटाया। “दादी, आपकी चूत को चाटूँगा,” उसने कहा और मेरी चूत चूसने लगा। “आह्ह, अजय, चूसो!” मैं चिल्लाई। उसने मेरे चूचों को मसलते हुए कहा, “दादी, आपके चूचे अभी भी रस से भरे हैं।” मैंने उसका लंड पकड़ा और मुँह में लिया। “अजय, तुम्हारा लंड चूसूँगी,” मैंने कहा और जीभ से लंड को चाटने लगी। “आह्ह, दादी, आप तो कमाल हो!” अजय चीखा।
आख़िर में अजय का लंड फट पड़ा। उसका गरम रस मेरी चूत में भर गया, फिर मेरी गांड में, और बाक़ी मेरे चूचों और होंठों पर छिड़क गया। “आह्ह, अजय, तुम्हारा रस मेरे मुँह में डालो,” मैंने कहा और उसके लंड से टपकता रस चाट लिया। हम दोनों हाँफते हुए बिस्तर पर गिर पड़े। “दादी, आपने मुझे जवान कर दिया,” अजय ने हँसते हुए कहा। “अजय, तुमने मेरी चूत की प्यास बुझा दी,” मैंने जवाब दिया। उसकी चुदाई की गर्मी मेरे जिस्म में समा गई थी।