Holi Sex Story, Holi me Bhabhi ki Gand Mari : मेरा नाम रोहित है, उम्र 26 साल। मैं नोएडा में अपने बड़े भाई और भाभी के साथ रहता हूँ। मेरा जिस्म मज़बूत है—चौड़ी छाती, मोटा लंड, और एक ऐसी हवस जो किसी की गांड को तबाह कर सकती है। मेरी भाभी, नेहा, 30 साल की थी—गोरी, भरी हुई चूचियाँ, मोटी जाँघें, और एक ऐसी गांड जो उसकी साड़ी में मटकती थी। उसकी जवानी मेरे लंड को हर वक्त तड़पाती थी। उसके गुलाबी होंठ, उसकी कमर की लचक, और उसके चूतड़ों की थिरकन मुझे पागल कर देती थी। होली का दिन था, और मैंने ठान लिया था कि आज भाभी की गांड मारूँगा।
होली की सुबह घर में रंगों की तैयारी शुरू हो गई थी। भाई को ऑफिस से फोन आया, “रोहित, मुझे बाहर जाना है, शाम को लौटूँगा। नेहा के साथ होली खेल लेना,” उसने कहा और चला गया। मैं और भाभी अकेले रह गए। भाभी ने एक टाइट सफेद कुर्ती और चूड़ीदार पहना था, जो उसके जिस्म से चिपक रहा था। उसकी चूचियाँ कुर्ती में उभर रही थीं, और उसकी गांड हर कदम पर लहरा रही थी। मैंने लुंगी और बनियान पहनी थी, और मेरा लंड पहले से ही तन रहा था। भाभी रसोई में थी, गुजिया बना रही थी। मैं पीछे से गया और उसकी कमर पर रंग मल दिया। “रोहित, ये क्या कर रहा है?” उसने हँसते हुए कहा, लेकिन उसकी आँखों में शरारत थी। मैंने उसकी चूचियों पर गुलाल मलते हुए कहा, “भाभी, आज तुम्हारी जवानी को रंग दूंगा।” वो सिहर उठी, और उसकी साँसें तेज़ हो गईं।
मैंने उसे रसोई के काउंटर से सटा दिया और उसके गुलाबी होंठों पर एक जंगली किस कर दिया। मेरी जीभ उसके मुँह में घुस गई, और मैं उसके होंठों को चूसने लगा। उसका किस इतना गर्म था कि मेरा लंड लुंगी में तड़पने लगा। उसने मेरी बनियान पकड़कर फाड़ डाली, और उसकी उंगलियाँ मेरी चौड़ी छाती पर फिसलने लगीं। “रोहित, तू बहुत शरारती हो गया है,” उसने सिसकते हुए कहा। मैंने उसकी कुर्ती ऊपर उठाई, और उसकी गोरी चूचियाँ मेरे सामने नंगी हो गईं। “भाभी, तेरी चूचियाँ कितनी मस्त हैं,” मैंने गुर्राया। मैंने उसकी एक चूची को अपने मुँह में लिया और उसे ज़ोर से चूसने लगा। मेरी जीभ उसके निप्पल पर नाच रही थी, और मेरा दूसरा हाथ उसकी दूसरी चूची को मसल रहा था। वो सिसकारियाँ भर रही थी, “रोहित, मेरी चूचियाँ चूसो, मेरी जवानी को चखो!” मैंने उसकी कुर्ती फाड़ डाली, और उसकी चूचियाँ हवा में उछलने लगीं। मैंने दोनों चूचियों को बारी-बारी चूसा, उसके निप्पल लाल हो गए।
मैंने उसकी चूड़ीदार नीचे खींच दी। उसकी मोटी जाँघें नंगी हो गईं, और उसकी गांड मेरे सामने थी। मैंने उसकी पैंटी को अपने दाँतों से फाड़ डाला, और उसकी गीली चूत और मस्त गांड मेरे सामने चमक रही थी। “भाभी, तेरी चूत और गांड देखकर मेरा लंड पागल हो रहा है,” मैंने कहा। मैंने उसकी जाँघें फैलाईं और उसकी चूत को चूम लिया। मेरी उंगलियाँ उसकी चूत को रगड़ने लगीं, और वो चीख उठी। मैंने उसकी चूत में जीभ डाल दी, और उसका गर्म रस मेरे मुँह में फैल गया। “रोहित, मेरी चूत चाटो!” उसने सिसकते हुए कहा। मैंने उसकी चूत को चाट-चाटकर गीला कर दिया। उसकी सिसकारियाँ रसोई में गूँज रही थीं। मैंने उसकी गांड को सहलाया और उसके चूतड़ों पर थप्पड़ मारे। “भाभी, तेरी गांड कितनी गोल है,” मैंने कहा। मैंने उसकी गांड में उंगली डाली, और वो चीख पड़ी, “रोहित, क्या कर रहा है?”
मैंने अपनी लुंगी उतारी, और मेरा मोटा लंड उसके सामने नंगा हो गया। “रोहित, तेरा लंड कितना मस्त है,” उसने सिसकते हुए कहा। उसने मेरे लंड को अपने नरम हाथों में लिया और उसे चूसने लगी। उसकी गर्म जीभ मेरे लंड पर फिसल रही थी, और मेरे जिस्म में आग लग गई। मैंने उसे काउंटर पर बिठाया और उसकी जाँघें फैलाईं। “भाभी, पहले तेरी चूत चोदता हूँ,” मैंने गुर्राया। मैंने अपने लंड को उसकी चूत में सटा दिया और एक ज़ोरदार धक्का मारा। उसकी चीख गूँज उठी, “रोहित, तेरा लंड मेरी चूत फाड़ देगा!” मेरा लंड उसकी चूत में घुस गया। मैंने उसकी कमर जकड़ी और उसे चोदना शुरू कर दिया। मेरे हर धक्के से उसकी चूचियाँ उछल रही थीं, और उसकी गांड काउंटर से टकरा रही थी। “रोहित, और ज़ोर से चोदो!” उसने चीखा। मैंने उसकी चूत को तबाह कर दिया, और वो मेरे नीचे सिसक रही थी।
फिर मैंने उसे उल्टा किया। उसकी गांड ऊँची हुई, और उसके चूतड़ मेरे सामने थिरक रहे थे। “भाभी, अब तेरी गांड की बारी है,” मैंने कहा। मैंने उसके चूतड़ों पर रंग मला और उन्हें ज़ोर से दबाया। उसकी गांड गुलाल से रंग गई। मैंने अपने लंड को उसकी गांड के छेद पर सटा दिया। “रोहित, मेरी गांड मत मारो, फट जाएगी!” उसने सिसकते हुए कहा। मैंने एक धक्का मारा, और मेरा लंड उसकी टाइट गांड में घुस गया। उसकी चीख हवा में गूँज उठी, “रोहित, मेरी गांड फट गई!” मैंने उसकी कमर पकड़ी और उसकी गांड को चोदना शुरू कर दिया। मेरे धक्कों से उसकी चूचियाँ हिल रही थीं, और उसकी चीखें तेज़ हो गईं। “भाभी, तेरी गांड चोदने का मज़ा ही अलग है,” मैंने गुर्राया। मैंने उसे और ज़ोर से चोदा, उसकी गांड लाल हो गई।
मैंने उसे बेडरूम में ले जाया। उसे बिस्तर पर उल्टा लिटाया और उसकी गांड में फिर से लंड डाला। “रोहित, मेरी गांड को छोड़ दो,” उसने चीखा, लेकिन उसकी चूत टपक रही थी। मैंने उसके चूतड़ों पर थप्पड़ मारे और उसकी गांड को चोदा। फिर मैंने उसे सीधा किया और उसकी चूत में लंड डाला। “भाभी, तेरी चूत और गांड दोनों चोदूँगा,” मैंने कहा। मैंने उसकी चूत को चोदा, और वो मेरे नीचे तड़प रही थी। मैंने उसे रसोई में ले जाया। उसे काउंटर पर बिठाया और उसकी गांड में लंड ठूँस दिया। “रोहित, मेरी गांड फाड़ डाल!” उसने चीखा। मैंने उसकी चूत में उंगलियाँ डालकर उसकी गांड को चोदा। उसकी चीखें रुक नहीं रही थीं।
मैंने उसे बाथरूम में ले जाया। शॉवर के नीचे उसकी गांड को फिर से चोदा। पानी उसकी चूचियाँ से टपक रहा था। मैंने उसे दीवार से सटाया और उसकी गांड में लंड डाला। “रोहित, मेरी गांड को रंग दो!” उसने सिसकते हुए कहा। मैंने उसके चूतड़ों पर रंग मला और उसे चोदा। फिर मैंने उसे छत पर ले जाया। वहाँ उसे लिटाकर उसकी गांड में लंड डाला। हवा में उसकी चूचियाँ हिल रही थीं। मैंने उसकी चूत को चाटा और उसकी गांड को चोदा। “रोहित, मेरी जवानी को चोद डाल!” उसने चीखा। मैंने उसकी गांड और चूत को बारी-बारी चोदा। उसकी चीखें छत पर गूँज रही थीं।
होली की वो दोपहर भाभी की गांड और चूत की चुदाई से रंगीन हो गई। उसकी चूचियाँ, जाँघें, चूतड़ मेरे लंड की गर्मी से भर गए। उसकी जवानी मेरे सामने नंगी थी, और उसकी चीखें मेरे कानों में गूँजती रहीं।